पैदा होते ही बेटी को दफनाया, वही बेटी बनी गुलाबो सपेरा, बढ़ाया देश का मान

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देश के कुछ राज्यों में लड़कियों के जन्म को अभिशाप माना जाता था। जिस घर में बेटी का जन्म होता था उसे गुनहगार माना जाता था। जो महिला बेटियों को जन्म देती थी उन्हें बहुत ही हिना दृष्टि से देखा जाता था। इस तरह की बातों के लिए खास तौर पर राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब का नाम काफी मशहूर है। यहां के लोग लड़कियों को जन्म के साथ ही मार देने में यकीन रखते थे।

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आज हम आपको एक ऐसी ही बेटी की कहानी बताने जा रहे हैं जिसे बचपन में पैदा होते ही दफना दिया गया था। लेकिन किस्मत ने इस लड़की को मशहूर डांसर बनाया। और इस इस लड़की ने अपने हुनर का परचम पूरे विश्व में फहराया।

गुलाबो सपेरा मौत पर जिंदगी की जीत - kalbelia folk dancer gulabo sapera to  get padma shree award - AajTak

दोस्तों आज हम बात कर रहे हैं गुलाबो सपेरा की। इनका जन्म सन 1960 में राजस्थान के अजमेर जिले में हुआ था। जब गुलाबो का जन्म हुआ और रिश्तेदारों को यह मालूम हुआ कि बेटी का जन्म हुआ है तभी सब ने गुलाबों को दफना दिया था ।ताकि यह सदा के लिए दुनिया से चली जाए।

गुलाबो सपेरा मौत पर जिंदगी की जीत - kalbelia folk dancer gulabo sapera to  get padma shree award - AajTak

प्रसव के बाद जब इनकी मां को होश आया तो इनकी माँ ने अपने नवजात बच्ची को देखने के लिए काफी जिद की। इनकी मां ने काफी शोर मचाया सबसे मिन्नतें की लेकिन किसी ने कुछ भी नहीं बताया। गुलाबो की मां अपने नवजात बच्ची को देखने के लिए सबके आगे रो गिड़गिड़ा रही थी। उस वक्त में इनका किसी ने साथ नहीं दिया। लेकिन उनकी मौसी से उनकी ऐसी दशा नहीं देखी गई। और उन्होंने गुलाबो की मां का साथ दिया।

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बता दें कि उनकी मौसी ने गुलाबों की मां से कहा कि वह जानती हैं उसकी नवजात बच्ची को कहां दफनाया गया है। वह रात में उसे उस जगह पर ले जा सकती है जहां पर उसकी बच्ची को दफनाया गया है । रात के अंधेरे में वे दोनों लोग वहां पहुंचे जहां गुलाबों को दफनाया गया था। जब गुलाबों को बाहर निकाला गया तब उनकी सांसे चल रही थी।

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इसके बाद उनकी मां ने गुलाब का इलाज करवाया और जल्दी ही पूरी तरह स्वस्थ हो गई। आपको बता दें कि गुलाबों के पिता सपेरे थे और अपने बीन की धुन पर सांपों को नचाने का काम किया करते थे। जब गुलाबो थोड़ी बड़ी हुई तो वह अपने पिता के साथ इसी काम में लग गई । और अपने पिता के साथ जाने लगी। गुलाबो भी अपने पिता की बीन पर नचा करती थी। और लोगों को अपने नाच दिखाती थी।

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केवल 17 साल की छोटी उम्र में गुलाबो का चयन फेस्टिवल ऑफ इंडिया के प्रोग्राम के लिए हुआ था। यह कार्यक्रम अमेरिका के वाशिंगटन में हुआ था। इस कार्यक्रम में उस समय के प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी भी उपस्थित थे ।इतने सारे बड़ी हस्तियों के सामने गुलाबों में विदेश में अपना यह नृत्य प्रस्तुत किया था। और सभी को आकर्षित कर लिया था।

Kalbelia Folk Dancer Gulabo Sapera Who Buried Alive After Birth - जन्म के  साथ ही जिंदा दफना दी गईं, जानिए दुनियाभर में पॉपुलर गुलाबो सपेरा की कहानी |  Patrika News

आपको बता दें कि गुलाबो प्रथम महिला थी जिसने कालबेलिया नृत्य सभी के सामने पेश किया था। यह नृत्य गुलाबो ने कहीं से भी सीखा नहीं था। बल्कि यह नृत्य इन्होंने इजात किया था। उनके समाज के लोगों ने बेटियों के प्रति अपना नजरिया बदल लिया था। गुलाबो कहती है कि उनकी सबसे बड़ी कमाई यही रही कि उनके कारण लोगों का नजरिया बदल पाया।

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आपको बता दें की बहुत कम लोगों को मालूम है कि गुलाब का असली नाम क्या है। गुलाबो का नाम धनवंतरी है। बचपन में काफी गोरी रही थी और उनके गाल गुलाबी रहते थे । इसलिए इनके पिता इन्हें गुलाबो कहा करते थे। गुलाबो सपेरा समाज की थी इसीलिए उन्होंने गुलाबों के आगे अपना नाम सपेरा लगा लिया। और यह गुलाबो सपेरा के नाम से मशहूर हो गई।

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बात अगर कालबेलिया नृत्य की करें तो यह महिलाओं के द्वारा किया जाता है। इस नृत्य में महिलाएं पूरा श्रृंगार कर के नृत्य पेश करती है । यह नृत्य अधिकतर बंजारन महिलाएं करती हैं। कालबेलिया नृत्य राजस्थान में काफी प्रसिद्ध है और इसे देखने हैं देश-विदेश के लोग इकट्ठा होते हैं।

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