कोरोना वैक्सीन का उत्पादन अगर बढ़ाना है तो करें यह काम – केंद्रीय मंत्री

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केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कोरोना टीके का उत्पादन बढ़ाने को लेकर अपना सुझाव दिया है। केंद्रीय मंत्री का कहना है कि टीके की मांग अगर ज्यादा रहेगी तो समस्या आनी स्वाभाविक है।

गडकरी ने कहा कि कोरोना टीके का उत्पादन किसी एक कंपनी से कराने की बजाय 10 और कंपनियों से कराना चाहिए। इससे देश में कोरोना टीके का उत्पादन 15 से 20 दिनों में बढ़ जाएगा।

गडकरी ने कहा कि एक बार टीका का उत्दापदन ज्यादा हो जाने पर इसकी आपूर्ति देश में हो सकेगी और टीका अगर बचता है तो उसका निर्यात भी किया जा सकता है। दरअसल, भारत में कोरोना का टीके का निर्माण अभी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बॉयोटेक कर रही हैं।

टीका उत्पादन का लाइसेंस 10 कंपनियों को दें-गडकरी

गडकरी ने कहा, ‘टीके की मांग यदि आपूर्ति से ज्यादा बनी रहेगी तो इससे समस्याएं खड़ी होंगी। टीका का उत्पादन एक कंपनी से कराने की जगह इसका निर्माण करने के लिए 10 कंपनियों को लाइसेंस देना चाहिए।

ऐसा करते हुए देश में टीके का उत्पादन 15 से 20 दिनों में बढ़ाया जा सकता है। वैक्सीन ज्यादा मात्रा में बनने पर एक तो देश में इसकी पर्याप्त आपूर्ति हो सकेगी, दूसरा यदि टीका बचता है तो इसका निर्यात भी किया जा सकता है।’

कई राज्यों में टीके की कमी

गत एक मई से देश भर में 18 से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है लेकिन कई राज्यों ने टीके की कमी होने की बात कही है।

राज्यों का कहना है कि वैक्सीन की कमी के चलते उन्हें अपने कई टीकाकरण केंद्रों को बंद करना पड़ा है। केंद्र सरकार का कहना है कि वह टीका का उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।

विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरों के साथ वर्चुअल बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में ऐसी कई कंपनियां हैं जो टीके का उत्पादन कर सकती हैं।

15 से 20 दिनों में बढ़ाया जा सकता है टीके का उत्पादन

उन्होंने कहा, ‘प्रत्येक राज्य में दो से तीन प्रयोगशालाएं हैं। आप इन्हें टीका बनाने के लिए लाइसेंस दीजिए। इन्हें यह काम 10 प्रतिशत रॉयल्टी के साथ सौंपा जा सकता है। टीका उत्पादन का काम 15 से 20 दिनों के अंदर हो सकता है।’

केंद्र सरकार ने पिछले गुरुवार को कहा कि मई तक उसके पास टीके के 7.30 करोड़ डोज उपलब्ध जाएंगे। इनमें से 1.27 करोड़ डोज राज्यों की तरफ से खरीदे जाने हैं। जबकि 80 लाख डोज निजी अस्तपालों द्वारा खरीदे जा रहे हैं।

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