सट्टा बाजार के अनुसार बंगाल समेत इन 5 राज्यों में बनेगी इस पार्टी की सरकार

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पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार है सिलीगुड़ी। यहां बंगाल विधानसभा चुनाव की सरगर्मी अंतिम चुनाव संपन्न होने के साथ ज्यादा बढ़ गयी है। क्योंकि सट्टा बाजार में यह सीमावर्ती क्षेत्र हमेशा ही फलता फूलता रहा है। अनौपचारिक तरीके से यहां करोड़ों रुपये लोग पड़ोसी राज्य सिक्किम, नेपाल, बांग्लादेश और भूटान से बैठकर लगा रहे हैं।

क्योंकि उन्हें पकड़े जाने का कोई डर नहीं है। सट्टा बाजार की बात करें तो यहां 27 मार्च से प्रारंभ पहले चरण के चुनाव के साथ ही भाजपा के भाव में तेजी आती रही है। सटोरियों की नजर में भाजपा सत्ता में आ रही है। सट्टा से जुड़े लोग बाजार का नब्ज सही तरीके से पहचानने वाले बताए जाते हैं।

यही कारण है कि चुनाव का जैसे जैसे चरण बढ़ता गया सट्टा बाजार तेजी से आगे की ओर भाग रहा है। जीत के पक्ष में होने के कारण ही भाजपा का भाव सबसे अधिक है। जो जानकारी मिली है उसके अनुसार अगर भाजपा को 161 से अधिक सीटें आती है तो लगाए पैसे के बदले डबल मिलेगा।

अगर भाजपा सत्ता में नहीं आती है तो अगला पैसा हार जाएगा। चौथे चरण में अ‌र्द्धसैनिक बलों की गोलीबारी की घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एक बार सट्टा बाजार में 140 सीटों पर दांव लगाया था

लेकिन फिर यह नीचे की ओर गिर गया। कांग्रेस और संयुक्त मोर्चा के लिए 15 से 20 सीटों से ज्यादा कोई सटोरिया नहीं दे रहा है। इसलिए उसका कोई भाव ही नहीं है।

यहां सीधी लड़ाई भाजपा और तृणमूल के बीच मानी जा रही है। वैसे बता दें कि सट्टा भारत में अपराध है। ऐसे खेल और जुआ का दैनिक जागरण हमेशा विरोध करता रहा है।

उसके बाद भी खबर तो खबर है। इसलिए पाठकों को जानकारी देना भी जरूरी है। कहते हैं कि सट्टा बाजार के आदि लोग तो जीत हार के लिए हवा में जूता उछालकर लाखों कमा लेते हैं और लाखों गवां भी देते है। उसे ऐसे में कैसे कोई पकड़ पाएगा।

भाजपा के जीत का दावा क्यों

सट्टा बाजार से जुड़े एक सटोरिया ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा के पक्ष में लोगों ने खामोशी से मतदान किया है। आदिवासी, किसान, दलित, पिछड़ा, राजवंशी, मतुआ, हिदी भाषी, गोरखा, मुस्लिम का एक वर्ग का भी वोट भाजपा के पक्ष में गया है।

सटोरिया का कहना है कि नये वोटरों और पुलिस प्रशासन के एक बड़े भाग का वोट भाजपा के पक्ष में गया है। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सट्टा बाजार में कौन हुआ राजा और कौन हुआ रंक।

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